उत्प्रेक्षा अलंकार(Utpreksha Alankar) की परिभाषा प्रमुख उदाहरण सहित

Utpreksha Alankar की परिभाषा प्रमुख उदाहरण सहित

उत्प्रेक्षा अलंकार किसे कहते है?

उत्प्रेक्षा अलंकार की परिभाषा – जहाँ उपमेय में उपमान होने की संभावना या कल्पना की जाती है, वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता है।

इसके लक्षण है- जनु, मनु, इव, मानो, मनो, मनहुँ, आदि।

पहचान – मनो, मानो, मनु, मनुह, जानो, इव, जनु, जानहु, ज्यों आदि शब्द अगर किसी अलंकार में आते है तो वह उत्प्रेक्षा अलंकार होता है।

उत्प्रेक्षा अलंकार के उदाहरण

उदाहरण सोहत ओढ़े पीत पर, स्याम सलोने गात।

              मनहु नील मनि सैण पर, आतप परयौ प्रभात।।

उदाहरण – चमचमात चंचल नयन, बिच घूँघट पट छीन।

मनहु सुरसरिता विचल, जल उछरत जुग मीन।।

उदाहरण – फूले कास सकल महि छाई।

             जनु बरसा रितु प्रकट बुढ़ाई।।

उदाहरण – ले चला मैं तुझे कनक, ज्यों भिक्षुक लेकर स्वर्ण-झनक।

उदाहरण – चित्रकूट जनु अचल अहेरी।

Explainationयहाँ चित्रकूट में अहेरी की संभावना व्यक्त की गई है।

उदाहरण – उस काल मारे क्रोध के, तनु काँपने उसका लगा।

मानो हवा के जोर से, सोता हुआ सागर जगा।।

उदाहरण – “लट लटकनि मनु मत्त,

मधुपगन माधुरी मधुर पिये|”

उदाहरण – “अरुन भये कोमल चरन,

भुवि चलबे ते मानु|”

उदाहरण – कहती हुई यो उत्तरा के, नेत्र जल से भर गए।

हिम के कणों से पूर्ण मानों, हो गए पंकज नए।.

उदाहरण – “तव पद समता को कमल,

जन सेक्त इक पाँय|”

उदाहरण – मानो माई धनधन अंतर दामिनि।

उदाहरण – मनु द्रग फारि अनेक जमुन निरखत ब्रज शोभा।

आप यह अलंकार भी पढ़ सकते है-

अनुप्रास अलंकारयमक अलंकारश्लेष अलंकार
पुनरुक्ति अलंकारवक्रोक्ति अलंकारवीप्सा अलंकार
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अतिशयोक्ति अलंकारउल्लेख अलंकारसंदेह अलंकार
भ्रांतिमान अलंकारअन्योक्ति अलंकारअनंवय अलंकार
दृष्टांत अलंकारअपँहुति अलंकारविनोक्ति अलंकार
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अत्युक्ति अलंकारसमासोक्ति अलंकारमानवीकरण अलंकार

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