उत्प्रेक्षा अलंकार की परिभाषा, 10+ उदाहरण सहित – Hindi Vyakaran

Utpreksha Alankar की परिभाषा प्रमुख उदाहरण सहित

उत्प्रेक्षा अलंकार किसे कहते है?

उत्प्रेक्षा अलंकार की परिभाषा – जहाँ उपमेय में उपमान होने की संभावना या कल्पना की जाती है, वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता है।

इसके लक्षण है- जनु, मनु, इव, मानो, मनो, मनहुँ, आदि।

पहचान – मनो, मानो, मनु, मनुह, जानो, इव, जनु, जानहु, ज्यों आदि शब्द अगर किसी अलंकार में आते है तो वह उत्प्रेक्षा अलंकार होता है।

उत्प्रेक्षा अलंकार के उदाहरण

सोहत ओढ़े पीत पर, स्याम सलोने गात।
मनहु नील मनि सैण पर, आतप परयौ प्रभात।।

चमचमात चंचल नयन, बिच घूँघट पट छीन।
मनहु सुरसरिता विचल, जल उछरत जुग मीन।।

फूले कास सकल महि छाई।
जनु रसा रितु प्रकट बुढ़ाई।।

ले चला मैं तुझे कनक, ज्यों भिक्षुक लेकर स्वर्ण-झनक।

चित्रकूट जनु अचल अहेरी।

चित्रकूट जनु अचल अहेरी।
व्याख्या – यहाँ चित्रकूट में अहेरी की संभावना व्यक्त की गई है।

उस काल मारे क्रोध के, तनु काँपने उसका लगा।
मानो हवा के जोर से, सोता हुआ सागर जगा।।

“लट लटकनि मनु मत्त,
मधुपगन माधुरी मधुर पिये|”

“अरुन भये कोमल चरन,
भुवि चलबे ते मानु”|

कहती हुई यो उत्तरा के, नेत्र जल से भर गए।
हिम के कणों से पूर्ण मानों, हो गए पंकज नए।.

“तव पद समता को कमल,
जन सेक्त इक पाँय|”

मानो माई धनधन अंतर दामिनि।

मनु द्रग फारि अनेक जमुन निरखत ब्रज शोभा।

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