जिला टीकमगढ़ District Tikamgarh – MP General Knowledge

जिला टीकमगढ़ – म.प्र. की जिलेबार (MP District Wise GK in Hindi) सामान्य ज्ञान

जिले का नाम जिला-टीकमगढ़ (District Tikamgarh)
गठन 1956
तहसील टीकमगढ़, बल्देवगढ़, जतारा, मोहनगढ़, लिधौरा, खरगापुर
पड़ोसी जिलों के साथ सीमा छतरपुर और उत्तरप्रदेश राज्य
जनसँख्या (2011)10,40,359
साक्षरता दर (2011) 61.43%
भौगोलिक स्थितिअक्षांतर स्थिति – 24o26′ से 25o33′ उत्तर
देशांतर स्थिति – 78o27′ से 79o21′ पूर्व

जिला-टीकमगढ़, सागर संभाग के अंतर्गत आता है। मध्यप्रदेश का जबलपुर, इंदौर, उज्जैन के बाद चौथा बड़ा संभाग सागर है।

सागर संभाग में 6 जिले आते है|

  1. सागर (District Sagar)
  2. दमोह (District Damoh)
  3. पन्ना (District Panna)
  4. छतरपुर (DistrictChhatarpur)
  5. टीकमगढ़ (District Teekamgarh)
  6. निमाड़ी (District Nimari)

MP Tikamgarh District Important GK Fact

MP GK - Jila Teekamgarh (MP General Knowledge)

टीकमगढ़ जिले का इतिहास

1956

तहसील – टीकमगढ़ (MP Districtwise GK in Hindi)

टीकमगढ़ जिले में 7 तहसीलें टीकमगढ़, बल्देवगढ़, जतारा, मोहनगढ़, लिधौरा, खरगापुर, पलेरा, है|

भौगोलिक स्थिति – टीकमगढ़ जिले की भौगोलिक स्थिति

टीकमगढ़ जिले का क्षेत्रफल लगभग 3,878 वर्ग किलोमीटर है| जिले की सीमा म. प्र. के छतरपुर जिले और उत्तरप्रदेश राज्य के साथ लगती है|

गर्मियों में जिले का तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक ऊपर पंहुच जाता है और सर्दियों में 5 डिग्री सेल्सियस तक नीचे गिर जाता है| यहाँ लगभग 95 मि.मी. औसत वार्षिक बारिश होती है|

मिट्टियाँ एवं कृषि – टीकमगढ़ जिले में मिट्टियाँ एवं कृषि

जलोढ़ मिट्टी

टीकमगढ़ जिले में जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है| जलोढ़ मिट्टी सर्वाधिक उपजाऊ मिट्टी होती है| इस मिट्टी का निर्माण नदियों द्वारा लाई गयी कछारों से होता है| जलोढ़ मिट्टी गेहू और कपास के लिए सर्वाधिक उपयुक्त मिट्टी मानी जाती है| यह उदासीन प्रकृति की मिट्टी है।

कृषि – टीकमगढ़ जिले में गेहू की खेती प्रमुख रूप से की जाती है।

पशुपालन – टीकमगढ़ जिले में पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए जिलेभर में प्रत्येक वर्ष गोकुल महोत्सव का आयोजन किया जाता है| इसके अलावा गोपाल पुरस्कार योजना के तहत भारतीय देसी नस्ल की गायों के दूध के लिए प्रतियोगिता की जाती है| इस योजना के अंतर्गत एक दिन में 15 किलो दूध देने पहले पालक को प्रथम पुरस्कार में 50 हजार रुपये, दुसरे पुरस्कार में 25 हजार और तीसरे पुरस्कार में 15 हजार गौ पालक को दिए जाते है| शेष प्रतियोगिता में भाग लेने वालों में से 7 को 5-5 हजार रुपये दिए जाते है| जिले में मछली पालन को भी महत्त्व दिया जा रहा है।

टीकमगढ़ जिले की प्रमुख नदियाँ

  • बेतवा नदी
  • जामनी नदी
  • धसान नदी

टीकमगढ़ जिले में बेतवा, जामनी और धसान नदियाँ प्रवाहित होती है।

सिंचाई एवं परियोजनाएं

केन बेतवा लिंक सिंचाई परियोजना –

जामनी नदी सिंचाई परियोजना –


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वन एवं वन्यजीव – District Teekamgarh

टीकमगढ़ जिले में लगभग 403 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र है| यहाँ के वनों में सागौन, नीम, शीशम,, पीपल, आदि वृक्ष बहुतायत से पाए जाते है| ऐसे वन क्षेत्र 55 से 105 से.मी. वर्षा वाले वन क्षेत्र में होते है| पानी की कमी होने के कारण पेड़ अपने पत्तों को गिरा देते है।

टीकमगढ़ जिले में बाघ, जंगली कुत्ते, चीतल, लोमड़ी, नीलगाय,हिरन, लंगूर आदि वन्य जीव पाए जाते है।

राष्ट्रीय उद्यान एवं अभ्यारण – टीकमगढ़

टीकमगढ़ वन्य जीव अभ्यारण – इस अभ्यारण की स्थापना वर्ष 1994 में की गयी थी| बेतवा नदी के किनारे स्थित इस अभ्यारण का क्षेत्रफल 46 वर्ग किलोमीटर है| टीकमगढ़ वन्य जीव अभ्यारण में चार प्रजातियों के कुल 125 गिध्द और उनके घोसलों की खोज की है| जिनमें से 50 देशी गिध्द, 63 श्वेत प्रष्ट गिध्द, 9 गोबर गिध्द और 3 राय गिध्द सम्मिलित है।

खनिज सम्पदा एवं उद्योग – टीकमगढ़ जिले में

पायरोफ्लाइट –

टीकमगढ़ जिला उच्च गुणवत्ता वाले पायरोफ्लाइट खनिज के निर्माण में एक अग्रणी जिला है| यहाँ से पायरोफ्लाइट का निर्यात पूरे भारत में किया जाता है। पायरोफ्लाइट एल्युमिनियम का जलीय सिलिकेट होता है। इससे उच्च क्षमता की सिरेमिक वस्तु बनाने में, विद्युत अवरोधी तथा रिफैक्ट्री में उपयोग किया जाता है।

उद्योग – टीकमगढ़ जिले में पीतल उद्योग स्थापित है। यहाँ का पीतल सम्पूर्ण देश में अपनी एक अलग पहचान रखता है।

टीकमगढ़ जिले में जनजाति

सौर जनजाति – मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिले में सौर जनजाति निवास करती है| सौर जनजाति आर्थिक और सामाजिक रूप से अत्यंत पिछड़ी जनजाति है| 2011 की जनगणना के अनुसार म. प्र. की कुल जनजाति की केवल 1 प्रतिशत सौर जनजाति की भागीदारी है| सौर जनजाति का निवास स्थान म. प्र. के टीकमगढ़, निवाड़ी, छतरपुर, दमोह, पन्ना, राजगढ़, होशंगाबाद और रायसेन आदि जिलों में है।

सहरिया जनजाति – टीकमगढ़ जिले में सहरिया जनजाति भी निवास करती है| सहरिया जनजाति प्रदेश के मुरैना, भिंड, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, टीकमगढ़ और रायसेन जिलों में पाई जाती है| सहरिया मध्यप्रदेश की पांचवी सबसे बड़ी जनजाति है।

टीकमगढ़ जिले की बोलियां

बोली – बुन्देली

टीकमगढ़ जिले में बुदेंली बोली प्रचलित है| पश्चिमी हिंदी की मुख्य बोली बुंदेली का विकास अपभ्रंश से हुआ है| इसका नामकरण जोर्ज ग्रियर्सन ने किया था| बुदेंली भाषा मध्यप्रदेश के छतरपुर, पन्ना, दमोह, निवाड़ी, सागर, दतिया, और नरसिंहपुर में प्रचलित है।

टीकमगढ़ जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल –

  • कुण्डदेव महादेव मंदिर
  • बल्देवगढ़
  • मदन सागर झील
  • अहार जी जैन मंदिर
  • खेड़ापति हनुमान मंदिर
  • जानकी मंदिर
  • अछरु माता
  • गुर्जर प्रतिहार कालीन सूर्य मंदिर

जिले के प्रमुख संग्रहालय –

स्थानीय संग्रहालय, कुंडेश्वर


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Teekamgarh DISTRICT के प्रमुख तथ्य –

  • टीकमगढ तालाब और पर्वतों का जिला है मध्यप्रदेश के इस जिले की सीमा उत्‍तरप्रदेश के साथ सबसे अधिक लगती है।
  • Tikamgarh जिले में प्रसिद्ध वार्षिक मेला लगता है। मलखेडा में एक बडा तालाब है।
  • टीकमगढ जिले में पायोराजी प्रसिद्ध जैन तीर्थ है।
  • बुंदेलखण्‍ड विकास प्राधिकरण का गठन 2007 में किया गया था इसका मुख्‍यालय सागर में है। इसके अंतर्गत सागर, दमोह, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़ जिले आते है।
  • टीकमगढ जिले के कुकड़ेश्वर मे प्रसिद्ध शिवलिंग है जिसका आकार प्रतिवर्ष  बढ़ जाता है।
  • टीकमगढ में चंदेल राजाओं ने तालाबो का निर्माण करबाया था इसे बुंदेलो की स्‍वर्ण भूमि कहा जाता है।
  • इसूरी, घाघ, जगनिक प्रसिद्ध लोक कवि है।
  • यहां पर वेतवा, धसान, जमानी, बागरी नदियां बहती है।

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मुरैनाभिण्डश्योपुरग्वालियर
दतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगर
भोपालसीहोररायसेनविदिशा
राजगढ़उज्जैनदेवासशाजापुर
आगर मालवारतलाममंदसौरनीमच
इंदौरधारझाबुआअलीराजपुर
बड़वानीखरगोनखण्डवाबुरहानपुर
सागरदमोहछतरपुरपन्ना
टीकमगढ़निमाड़ीरीवासतना
सीधीसिंगरौलीशहडोलउमरिया
अनूपपुरजबलपुरनरसिंहपुरछिंदवाड़ा
बालाघाटमण्डलाडिंडोरीसिवनी
कटनीबैतूलहरदानर्मदापुरम

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