हिंदी भाषा की बोली, भाषा, विभाषा/उपभाषा, राजभाषा,राट्रभाषा, मानक भाषा

हिंदी भाषा की बोली, भाषा, विभाषा/उपभाषा, राजभाषा,राट्रभाषा, मानक भाषा की इस लेख में

बोली

विचारों का आदान प्रदान करने वाली भाषा का रूप है यह भाषा का घरेलू रूप है इसका सीमित  लघु क्षेत्र होता है इसका कोई व्याकरण साहित्य नहीं होता

विभाषा/ उपभाषा

बोली की अपेक्षा  इसका क्षेत्र बड़ा होता है इसमें छुटपुट लोक साहित्य लोक गीत लिखे जाते हैं कोई निर्धारित व्याकरण नहीं होता

भाषा

बोली का वह रूप जो एक विस्तृत क्षेत्र में बोला जाता है  जिसका अपना व्याकरण होता है जिसमें साहित्यिक रचनाएं होती हैं जो शिक्षा का माध्यम है  भाषा कहलाती है 

जैसे:-  ब्रज, अरबी 

बोली भक्ति काल के सूरसागर, रामचरितमानस के कारण ब्रजभाषा व अरबी भाषा बन गई

राजभाषा

वह भाषा जो संविधान द्वारा मान्य की गई है| खड़ी बोली हिंदी राजभाषा है| यह 10 राज्यों की भाषा है इसे संविधान के अनुच्छेद 343 के अंतर्गत मान्यता मिली  व क्रमशः 351 तक इसमें संशोधन होते गया प्रशासकीय कार्यालय में राजभाषा का ही उपयोग किया जाता है 

राष्ट्रभाषा

वह भाषा जो बहुमत द्वारा बोली जाती है हिंदी भारत की राष्ट्रभाषा है

अंतरराष्ट्रीय भाषा

अंतरराष्ट्रीय देशों के मध्य कार्रवाई करने बाबत जिस भाषा को मान्य किया गया है अंतरराष्ट्रीय भाषा कहलाती है अंग्रेजी अंतरराष्ट्रीय भाषा है

संपर्क भाषा

वह भाषा जो दैनिक जीवन में विचारों के आदान-प्रदान में उपयोग में आती है इसमें आधे अधूरे  वाक्य भी  बोले जाते हैं इसका उद्देश्य केवल विचारों को प्रस्तुत करना है

प्रयोजनमूलक हिंदी

हिंदी भाषा का वह रूप जो किसी विशेष प्रयोजन के लिए किसी विशेष उद्देश्य की पूर्ति के लिए तैयार किया गया इसमें परिभाषिक शब्दावली का विशेष महत्व है इस भाषा का प्रयोग संचार व्यवस्था व विज्ञान और तकनीक क्षेत्र में विशेष  अस्तित्व के लिए है 

Manak Bhasha – मानक भाषा

मानक को अंग्रेजी में स्टैंडर्ड कहते हैं वे शब्द जो परिनिष्ठित परिमार्जित होते हैं मानव शब्द कहलाते हैं इन्हें टकसाली शब्द भी कहते हैं 

मानक भाषा की आवश्यकता भाषा में एकरूपता लाने के लिए पड़ी अर्थात मानक के द्वारा एक निश्चित अर्थ का बोध होता है

मानव शब्द के निम्न लक्षण हैं

 सर्वमान्य

 सर्वग्राही

 जीवतंता

 ऐतिहासिकता 

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