श्लेष अलंकार की परिभाषा,प्रकार तथा उदाहरण | Shlesh Alankar in Hindi Grammar

श्लेष अलंकार की परिभाषा, उदाहरणShlesh Alankar

Shlesh Alankar kise kahate hai? –

श्लेष अलंकार की परिभाषा – श्लेष का अर्थ है – “चिपका हुआ” अर्थात एक ही शब्द के एक से अधिक अर्थ निकले अर्थात शब्द एक अर्थ चिपका हुआ या एक शब्द के अनेक अर्थ निकलते हैं, उसे हम श्लेष अलंकार (Shlesh Alankar) कहते हैं|

श्लेष अलंकार दो प्रकार के होते है-

  1. अभंग श्लेष
  2. सभंग श्लेष

Shlesh Alankar ke Udaharan: उदाहरण

उदाहरण – 1 रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून|

               पानी गए न ऊबरे, मोती मानुस चून ||

व्याख्या: उपर्युक्त उदाहरण में मोती के लिए पानी का अर्थ ‘चमक’ और मानुस के लिए ‘इज्जत’ तथा चून के लिए ‘चून (आटे) के लिए पानी है। इस प्रकार श्लेष अलंकार में एक ही शब्द के अनेक जगह पर अलग – अलग अर्थ होते है। इस प्रकार एक ही शब्द के चिपके हुए अलग अलग अर्थ है।

उदाहरण – 2  रात कली एक ख्वाब में आई और गले का हार हुई।

उदाहरण – 3  आप कुछ भी कहें मैं तो इसे हरि की कृपा मानता हूँ|

Example – 4  हे प्रभु हमें दो जीवनदान

उदा.- 5  मंगन को देख पट देत बार बार

व्याख्या: इस उदाहरण में ‘मंगन’ के दो अर्थ कपडे तथा दरवाजा है।

उदा.- 6 जो रहीम गति दीप की, कुल कपूत गति सोय।

             बारि उजियारे लागे, बढे अंधेरो होय।।

व्याख्या – बढे शब्द के दो चिपके हुए अर्थ – बढे – बड़ा होने पर, बढे – बुझने पर

उदा.- 7 मेरी भव बाधा हरो राधा नागिन सोये 

            जा तन की छाई परे स्याम हरित दुत होये 

उदा.- 8  जो घनीभूत पीड़ा थी,  मस्तिष्क में स्मृति सी छाई

             दुर  दिन में आंसू बनकर, आग बरसने आयी|  

उदा.- 9 चरण धरत चिंता करत चितवत चारोंहुँ ओर

             सुवरन को खोजत फिरे, कवि, व्यभिचारी, चोर।।

व्याख्या – ‘सुवरन‘ के तीन अर्थ – सुवरन – अच्छे शब्द, सुवरन – स्वर्ण और सुवरन – सुन्दर स्त्री है।

उदा.- 10  चिर जीवो जोरी जुरै, क्यों न सनेह गंभीर

               को घटि ये वृषभानुजा, वे हलधर के वीर।।

अन्य श्लेष अलंकार के उदाहरण और व्याख्या

उदा. – 11 प्रियतम बतला दे लाल मेरा कहाँ है।

व्याख्या: ‘लाल’ का अर्थ बेटा या रत्न है।

उदा.- 12 माया महाठगनी हम जानी

त्रिगुण फ़ांस लिए कर डोले बोले मधुर वाणी।।

व्याख्या – त्रिगुण का अर्थ – सत, रज, तम

उदाहरण – 13 नर की अरु नलनीर की गति एकै कर जोय

जेतो नीचो हवै चले ततो ऊंचो हो।.

उदाहरण – 14 मधुवन की छाती को देखो, सूखी कितनी इसकी कलियाँ

व्याख्या : ‘कलियाँ’ शब्द के चिपके हुए अर्थ – कलियाँ – फूल खिलने से पहले कली, कलियाँ – यौवन से पहले की अवस्था है।

उदाहरण – 15 रावण सर सरोज बनचारी।

चलि रघुबीर सिलीमुख धारी।। ( सिलीमुख – बाण, भ्रमर )

पढ़ें – सम्पूर्ण हिंदी व्याकरण पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

Type of Shlesh Alankar –

अभंग श्लेष की परिभाषा

जब शब्दों को बिना तोड़े दो या दो से अधिक अर्थ निकलते हों, वहां ‘अभंग श्लेष’ होता है|

अभंग श्लेष अलंकार के उदाहरण –

उदाहरण – चरण धरत चिंता करत, चितवत चारहुँ ओर|

सुबरन को खोजत फिरत, कवि, व्यभिचारी, चोर ||

व्याख्या: उपर्युक्त उदाहरण में सुवरन शब्द के दो से अधिक चिपके हुए अर्थ है। कवि के अनुसार सुवरन का अर्थ – ‘सुन्दर अक्षर‘ तथा व्यभिचारी के लिए सुवरन का अर्थ – ‘सुन्दर स्री’ एवं चोर के लिए सुवरन का अर्थ ‘सोना‘ है।

सभंग श्लेष की परिभाषा

जब शब्द विशेष से श्लेष का अर्थ निकालने के लिए उसे जोड़ा-तोड़ा जाता है, वहाँ ‘सभंग श्लेष’ होता है|

सभंग श्लेष अलंकार के उदाहरण –

उदाहरण – चिर जीवो जोरी जुरै, क्यों न सनेह गंभीर|

को घटि ये बृषभानुजा, वे हलधर के वीर||

यमक और श्लेष अलंकार में अंतर –

यमक अलंकार में एक ही शब्द एक से अनेक बार आता है और हर बार उसका अर्थ भिन्न होता जबकि श्लेष अलंकार में एक शब्द एक ही बार आता है और एक ही शब्द के दो या दो से अधिक अर्थ निकलते है। जैसे – यमक अलंकार के उदाहरण “‘तीन बेर खाती थी वो तीन बेर खाती है” में 3 बेर शब्द दो बार आया है और दोनों बार उसका अर्थ अलग है एक बार ‘बेर’ का अर्थ – 3 बार तथा दूसरी बार ‘बेर’ का अर्थ – 3 बेर के दाने है।

लेकिन श्लेष अलंकार के उदाहरण – “चरण धरत चिंता करत, चितवत चारहुँ ओर,सुवरन को खोजत फिरत, कवि, व्यभिचारी, चोर।।””में सुवरन शब्द केवल एक बार आया है और उसके दो से अधिक चिपके हुए अर्थ है। कवि के के लिए सुवरन का अर्थ – ‘सुन्दर अक्षर‘ तथा व्यभिचारी के लिए सुवरन का अर्थ – ‘सुन्दर स्री’ एवं चोर के लिए सुवरन का अर्थ ‘सोना‘ होता है।

इस प्रकार यमक अलंकार और श्लेष अलंकार में अंतर एक शब्द का है जो यमक अलंकार में एक से अनेक बार आ सकता है लेकिन हर बार उसका अर्थ भिन्न होता है, और श्लेष अलंकार में एक शब्द एक ही बार आता है और उसका अर्थ ‘चिपका हुआ’ होता है और उसी एक शब्द के अर्थ भिन्न हो सकते है।

आप यह अलंकार भी पढ़ सकते है-

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पुनरुक्ति अलंकारवक्रोक्ति अलंकारवीप्सा अलंकार
उपमा अलंकारप्रतीप अलंकाररूपक अलंकार
उत्प्रेक्षा अलंकारव्यतिरेक अलंकारविभावना अलंकार
अतिशयोक्ति अलंकारउल्लेख अलंकारसंदेह अलंकार
भ्रांतिमान अलंकारअन्योक्ति अलंकारअनंवय अलंकार
दृष्टांत अलंकारअपँहुति अलंकारविनोक्ति अलंकार
ब्याज स्तुति अलंकारब्याज निंदा अलंकारविरोधाभास अलंकार
अत्युक्ति अलंकारसमासोक्ति अलंकारमानवीकरण अलंकार

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