यमक अलंकार की परिभाषा, प्रकार, उदाहरण | Yamak Alankar in Hindi Grammar

1.यमक अलंकार किसे कहते है?

यमक अलंकार की परिभाषा :– एक शब्द एक से अधिक बार आवे और हर बार अलग-अलग अर्थ निकले, वहाँ यमक अलंकार होता है।  

I. यमक अलंकार के उदाहरण – (Yamak Alankar ke Udaharan)

जैसे- कनक-कनक ते सौ गुनी, मादकता अधिकाय।

या खाए बौराय जग, वा पाए बौराय।।

उपर्युक्त लिखे उदाहरण में कनक शब्द दो बार आया है और दोनों ही बार उसका अर्थ भिन्न है एक कनक का अर्थ – सोना, तथा दूसरे कनक का अर्थ – धतूरा है। इस प्रकार एक ही शब्द दो या दो से अधिक बार आये और उसका अर्थ हर बार भिन्न हो वहां यमक अलंकार होता है।

जिस प्रकार अनुप्रास अलंकार में एक ही वर्ण बार-बार आता है उसी प्रकार यमक अलंकार में भी एक ही शब्द दो या दो से अधिक बार आता है और इस प्रकार विशिष्ट शब्दों के प्रयोग के कारण काव्य की शोभा बढ़ जाती है।

  • सपना सपना समझकर भूल न जाना (यहाँ एक सपना शब्द का अर्थ – किसी का नाम, तथा दूसरे सपना शब्द का अर्थ – रात में आने वाला स्वप्न )
  • तीन बेर खाती थी वो तीन बेर खाती है। ( तीन बेर – तीन बेर के दाने, तीन बेर – तीन बार )
  • माला फेरत जुग भया, मिटा ना मनका फेर, कर का मनका डारि के मन का मनका फेर।। ( मनका – माला का दाना, मन का – हृदय का )
  • कहै कवि बेनी, बेनी ब्याल की चुराई लानी। ( बेनी – कवि, बेनी – चोटी )
  • रति-रति शोभा सब रति के सरीर की ( रति-रति – जरा सी, रति – कामदेव की पत्नी )
  • भजन कहयौ ताते भज्यौ, भज्यौ न एको बार ( भज्यौ – भजन किया, भज्यौ – भाग किया )
  • सजना है मुझे सजना के लिए ( एक सजना का अर्थ – श्रृंगार करना, दूसरे सजना का अर्थ – प्रियतम, प्रेमी, पति )
  • दीरघ साँस न लेइ दुख, सुख साँई मति भूल, दई दई क्यों करत हैं, दई दई सु कबूल।। 
  • काली घटा का घमंड घटा
  • जेते तुम तारे, तेते नभ में न तारे 
  • हरि हरि रूप दियो नारद को
  • जिसकी समानता किसी ने कभी पायी नहीं, पायी के नहीं अब वे ही लाल माई के। 

II. Yamak Alankar के अन्य Example

  • सबकी बेगम बेगम है
  • उधो जोग जोग हमने
  • तोपे बौरा उर्वशी  सुन राधिका के सुजान, तू मोहन के उर्वशी,  हवे उरवशी समान।। 
  • लोक में फैला सूर्यलोक 
  • सूर सूर तुलसी शशि
  • तुम्हारी नौकरी के लिए कह रखा है सालों से सालों से।
  • कबिरा सोई पीर है, जे जाने पर पीर। जे पर पीर न जानई, सो काफिर बेपीर।।

जरूर पढ़ें: यमक और श्लेष अलंकार में अंतर

  • या मुरलीधर की अधरार-धरी अधरान धरौंगी।
  • खग कुल-कुल-कुल सा बोल रहा है।
  • पास ही रे, हीरे की खान। उसे खोजता कहाँ नादान।।
  • ऊंचे घोर मंदर के अंदर रहनवारी, ऊँचे घोर मंदर के अंदर रहाती है।
  • पच्छी पर छीने एसे परे पर छीने बीर, तेरी बरछी ने बर छीने है खलन के।.

आपने ऊपर लिखे सभी यमक अलंकार के Example को और समझा होगा, यही की यमक अलंकार को पहचानना कितना आसान है| जब एक ही शब्द एक से अधिक बार आता है और उसका अर्थ हर बार अलग होता है तो वहां यमक अलंकार होता है |

2. Yamak Alankar दो प्रकार के होते है-

I. अभंग पद यमक
II. सभंग पद यमक

आप यह अलंकार भी पढ़ सकते है-

अनुप्रास अलंकारयमक अलंकारश्लेष अलंकार
पुनरुक्ति अलंकारवक्रोक्ति अलंकारवीप्सा अलंकार
उपमा अलंकारप्रतीप अलंकाररूपक अलंकार
उत्प्रेक्षा अलंकारव्यतिरेक अलंकारविभावना अलंकार
अतिशयोक्ति अलंकारउल्लेख अलंकारसंदेह अलंकार
भ्रांतिमान अलंकारअन्योक्ति अलंकारअनंवय अलंकार
दृष्टांत अलंकारअपँहुति अलंकारविनोक्ति अलंकार
ब्याज स्तुति अलंकारब्याज निंदा अलंकारविरोधाभास अलंकार
अत्युक्ति अलंकारसमासोक्ति अलंकारमानवीकरण अलंकार

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